विषया विनिवर्तन्ते

विषया विनिवर्तन्ते निराहारस्य देहिनः ।
रसवर्जं रसोऽप्यस्य परं दृष्टवा निवर्तते।।

Chapter: 
2
Sankhya: 
59
Bhavarth: 

बरसै कंबल भींजै पानी

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सद्गुरु कबीर की बहुचर्चित उलटवनियों के रहस्य को खोलते हुए सुख, समृधि और आत्मशांति पर गुरु माँ ज्ञान के प्रवचन

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अवगुण कहूँ शराब का

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अल्कोहल, तम्बाकू, भांग और न जाने कितने रूपों में नशा अज पुरे समाज को कष्टपीड़ित कर रहा है | यह  पुस्तक न केवल अध्यात्म प्रेमियों, बल्कि अच्छे स्वस्थ और समाज सुधार के इच्छुक के लिए भी है| स्वयं भी पढ़े और अन्य को भी पढ़ायें 

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श्री कबीर ज्ञान भजनावली

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सद्गुरु कबीर साहब के प्रसिद्ध भजनों के साथ 'ज्ञान-उद्गार' के अंतर्गत परम वन्दनीय माँ ज्ञान के भजन का संग्रह

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भक्ति का मार्ग झीना रे

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चिंता से सुख कि ओर

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मानव जीवन को नरक समान बनाने वाली चिंता से मुक्त होने कि कला इस पुस्तक से सीखें 

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दत्तात्रेय के चौबीस गुरु

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कण कण में पसरी सद्गुरु सत्ता बिना किसी देह या भाषा के मार्गदर्शन करती रहती है, इस पुस्तक से जाने इसे अनुभव कर ग्रहण करने कि कला |

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एकाग्र मन

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चंचल मन को वश में करने के आसन तरीके विधियाँ | व्यवहारी एवं पारमार्थिक सफलता हेतु उपयोगी

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मन गोरख मन गोविंदा

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मन एक चमत्कारिक करिश्माई चीज़, तिलस्मी खजाना से परिपूर्ण असीम शक्ति का सागरत है | इसकी प्रसुप्त को जगाने कि समस्त साधनाए, योग युक्तियाँ, एवं ध्यान धारणाओं का स्पष्ट दिक्दर्शन

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गुरु है बड़े गोविन्द से

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दो भुजधारी गुरुदेव चतुर्भुजधारी गोविन्द से बड़े कैसे ? कौन सा कार्य है जो गोविन्द नहीं, केवल गुरु ही कर सकते हैं ? पढ़े और जाने |

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